सोमवार, 3 नवंबर 2014

घार-बूण छ्वणणकु दुख

देशम रैकि अपुड़ु घार-गुठ्यारकि भठुलि नि लगदि। इन बि बोल सकदो कि देशि-विदेशि पाणि और माटु मा रब्‍दोलि कि पहाड़्यूं कि जिकुड़ी झुरेंदि नी अबा। जबरि लोगुं थै लगा कि ये देशल आजादी लियाल, तभि भठै पहाड़ियुं कु अपिड़ि घार-गुठ्यरि छोड़िकि इनै-उनै जाणु लग्‍यूंचा। वखका ल्‍वगुंल यो भि नि स्‍वाचु कि जख ऊंक जीवनकू अंकुर फुटा, वी धरती थै सदनिकु छ्वड़णकु क्‍या मतलबचा। क्‍या कैथे अपिड़ि जन्‍मभूमिका अलावा कखि और सै मान-सम्‍मान मीलसकदा, यो प्रश्‍न हरेक पहाड़ी थै अफुथै पुछण चैंणुच। मीथै विश्‍वास चा कि येका बाद अपड़ु पहाड़ी घार-गुठ्यारु छ्वण से पैलि पहा‍ड़्यूं थैं कतगै दा स्‍वचुण प्‍वाड़लु। 
          इबरि पहाड़ुंकि हालत या हुईंचा कि वख गां-का-गां और घार-का-घार उड्यार हुंया छी। कै कै घारम बूड-बुड्यौं थै छोड़िकि और क्‍वी मनिख नि देखेंदु। बाघ जूदा लग्‍यूंच। म्‍यार गांवै समिणि मल्‍था गां च। जबरि सर्या दुनिया दिवालि मनाणै तयारि कनी छाई, उबरि यानि कि ठिक दिवलि से एक या द्वी हफ्ता पैलि मल्‍था गांवकि द्वी कज्‍यण्‍यू थै बाघल मार द्या। समाचारुंम पिथौरागढ़कि बारम भि पाड़। वख भी निर्भ‍गि आदमखोर बागल आठ-दस लोग धधोड़ दीं। देवभूमि कु ये सै ज्‍यादा दुर्भाग्‍य और क्‍या ह्वै सकद! हमरि धरती कु यो कन बरमंड रुस्‍याणुचा। 
          जगा-जगा गदनों फर डाम-डामर ठोकिकै, पाणि रोकिकी बिजली बणाणकु जो भूत देशाकि और राज्‍य सरकार फर सवार हुयूंचा, वै‍कु परिणाम ता केदारनाथकि तबैका रूपमा हम सबुल दे‍खी या‍ल, पर अपड़ा घार-बूण छवणणकि सजा भी पहाड़्यूं थैं बागैकि डैरकि रूपम मिलणीच।

5 टिप्‍पणियां:

  1. क्‍या लिखा समझ में तो नहीं आया। पर जो भी है अच्‍छा ही होगा।

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  2. इस आंचलिक लेखन के लिए बधाई और उत्प्रेरक टिप्पणियों की आंच बस यूं ही सुलगाये रहिये।

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  3. इस आंचलिक लेखन के लिए बधाई और उत्प्रेरक टिप्पणियों की आंच बस यूं ही सुलगाये रहिये।

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  4. इस आंचलिक लेखन के लिए बधाई और उत्प्रेरक टिप्पणियों की आंच बस यूं ही सुलगाये रहिये।

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  5. सच्ची भैजी बहोत बढिया पहाड़ मेसे भी छूटी गे पर पराण वक्खी लग्यू रोंदू।
    अपरि बोली क ब्लोग पढीक बहोत अच्छु लग
    बहोत आभार

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