शुक्रवार, 22 जुलाई 2016

म्‍यारा मुलुक ऐयि

म्यारा मुलुक ऐयि
बबा...! चांणा बुखै जैयि
हे...! बद्रीनाथ जैयि
केदारनाथ जैयि
गंगोत्री-यमुनोत्री का दर्शन कैकि
पापि पराण अपुणु बुझै जैयि
हे...! उकलि का बाटा यखा
उंधरि मा लाटा यखा
भारे...! लाठि टेकि ऐयि
हां...! लाठि टेकि जैयि
रंग-बिरंगा कि डालि-बूटि
हारा पुंगड़ा हारि चोटि
ठंडि हवा ठंडू पाणि
बबा...! पाणि पेकि जैयि
म्यारा मुलुक ऐयि
पंद्यरूं मा ब्यठुलों का
बंठा उठै जैयि
हां...! बंठा बिछै जैयि
घस्यरयूं का घासा का
फंचा नि चुलैयि
दथड़ा नि लुकैयि
म्यारा मुलुक ऐयि
ब्यटा...! खाजा बुखै जैयि
लाटा...! च्यूड़ा चबै जैयि
ब्वाडा कि गिचपुटगै कि बीड़ी नि लूछि
नौन्यलू थै दारू-भंगुलू-बीड़ी नि पूछि
आण ह्वल त् अक्वै ऐयि
आदिमी बणिकि
पाणि पेकि यखकु
यख करौं नि परिखि
छुचा...! म्यारा घार ऐयि
एक राति रैयि
म्यारा मुलुक ऐयि
म्यारा पहाड़ ऐयि...

विकेश कुमार बडोला

बुधवार, 24 जून 2015

घार-गुठ्यार खुणै

पहाड़ुका गांवुमां क्‍या हूड़ूंचा, वखका लोग कनखै रैणाछीना और वखकि जिन्‍दगी कदगै तरैसे मुश्किलमा प्‍वड़िंचा यांकि चिन्‍ता केन्‍द्रीय और राज्‍य सरकार थै इलै नीचा किलैकि वख चुनावा खुणै ज्‍यादा लोग निछीं। यदि भ्‍वा‍लि भटै गढ़वलि लोग दस-दस बारह-बारह लौड़ा-बाला पैदा कैरिकी गढ़वालमै रैंदिना ता चारों तरफ का नेता फ‍िर वखका लोगों कि चिन्‍ता जरूर करारला।
          इलै  मेरी वखकि लोगुथैं सलाह चा कि वो अपड़ि-अपड़ि मौ ढंग से बड़ांवा। एक ना, द्वी ना, तीन ना बल्कि आठ-आठ दस-दस लौड़ा-बाला पैदा कारा। पहाड़ुंकू विकास खुणै, वखका लोगुंकू बारामा राष्‍ट्रीय राजनीति का ध्‍यान खिंचणाखुणै एक ही तरीकाच। और वोच व‍खकि स्‍थानीय जनसंख्‍या मा बढ़ोतरी। अगर यो काम ह्वैजालु ता उत्‍तराखण्‍ड थै सबकु आकर्षणु कु केन्‍द्र बण्‍ाणम देर नि लगलि।

शुक्रवार, 5 जून 2015

कनखै अपड़ा गढ़वाल थै दुबारा रैण जुगा बणौं

घाराकु और बूणाकु बीचमा फर्क करणु कतगैदा मुश्किल ह्वैजांद। समझम आंदू नीच कि क्‍या करण? घार रैणकि व्‍यवस्‍था करणा या बूण और घारा का बीच इन्‍नी चक्‍कर लगाणू रैण। सन 1988 मा नोएडा में आ छाई ता मि दस-ग्‍यारह सालाकु कौथगेर लौड़ु छायी। लेकिन इत्‍गा बिग्‍ड़यू भी नि छायी कि दुसरों थैं परेशान कैरु, पर इतगा साीधु भि नि छायी कि कौथिग्‍यकि भनक सूणीकि भि चुप बैठ्यूं रैंदु व्‍हलू। 
          अपुड़ु ब्‍वै-बबा और घार-गुठ्यार छोड़िकि कख जाणू छौं, कै दगड़ जाणू छौं ई बाताकु एहसास मीथै बड़ु हूंद-हूंद भि नि ह्वाई। मेरी बुदि्ध इतगा भ्रष्‍ट छाई कि अफु खुणै मिला अफी खड्वलु खैण, जैमा मि आज तक प्‍वाड़युं छौं। ब्‍वे-बबा फर भि इतगा अकल निछाई कि ऊंल जरा भि स्‍वाच ह्वालु कि अपड़ी औलाद कख, कै दगड़ा भ्‍यजणै। आज ब्‍वे-बबूं, दद्दा-दद्दी फर ता ग्‍वस्‍सा आंदी चा, अफु फर सबसे ज्‍यादा ग्‍वस्‍सा आंदा कि मि कतगा कौथगेर किस्‍माकु आदिम छायी।
           अगर मि या म्‍यारा जन लोग अपड़ै घारम रैंदा ता आज हमथै द्वि कौड़ि कि नौकर्यूं का चक्‍कर मा फंसिकी यो नि स्‍वचुण प्‍वड़दु कि शहरूं मा रै-रै की अब हम घार-बूण कनखै संभाल सकदौ। ब्‍वनौ मतलब योचा कि जिकुड़ी जै घारमा रैण खुणै धक-धक कनीचा, जै गढ़वालमा जीणा खुणै तरसिणीचा वखका मनख्‍यूंकु पलायन हूण से घार-गुठ्यार, गां-गाला सब खाली ह्वैगिन। अबता म्‍यार मनमा ई चिन्‍ता रैंदा कि कनखै अपड़ा गढ़वाल थै दुबारा रैण जुगा बणौं।
          ब्‍यालि राति मीथै एक सुपन्‍या आ। गांवकु जो हमरु घार चा और घार तक जाणकु जो रस्‍ता चा, वेका दैणा तरफ मिल शहरी विकासिस हुयूं द्याख त चौंक ग्‍यो। मिल स्‍वाचा, कि यख हमरा गढ़वालमा यो शहरजन सड़िकी, पार्क अौर चमक-दमक कनखै आई। रस्‍ता चलद-चलद गांवका मैदान कुंडाका समणि औ त द्याखा कि सर्य्‍या कुंडामा एक बड़ी बिल्डिंग बणणीच। वखम कट्ठा हुयां लोगुंथै पूछा कि यखम यो क्‍या बणणूचा और कैल येथै बणाणैकि इजाजत द्याई, ता कैल बताई कि ठकराल नामकु बिल्‍डरल या सर्य्‍या जमीन खरीद्याल और वो येफर अपिणी बि‍ल्डिंग बणाणूचा। ईं बात सूणिकी म्‍यारु पारा चैढ़ग्‍या। मि गांवका लोगुथै इकट्ठा कैरिकी ठकरालाका विरोधमा खड़ु ह्वैग्‍यो। लोग मीथै समझाण बैठगी कि ये दगड़ पंगा नि लै। पर मिल बिल्डिंग बणाणवला ठ्यकादरुं थै ठकरालूकु फोन नम्‍बर दीणा खुणै ब्‍वाल। तभी मिल क्‍या द्याख कि ठकराल कुंडा मा आग्‍याई और वैका सब्‍या आदिम, सब्‍या इंजीनियर अौर ठ्यकादार ज्‍यामां मर्द-जनना सब्बि छीं, लैन लगैकि वैका दर्शन करणाकु खड़ा ह्वैगिन। .................
          सुपन्‍या खुल्‍ग्‍याई त मिल अफुथै नोएडा का सेक्‍टर-12 का एक घारम पाई।

सोमवार, 3 नवंबर 2014

घार-बूण छ्वणणकु दुख

देशम रैकि अपुड़ु घार-गुठ्यारकि भठुलि नि लगदि। इन बि बोल सकदो कि देशि-विदेशि पाणि और माटु मा रब्‍दोलि कि पहाड़्यूं कि जिकुड़ी झुरेंदि नी अबा। जबरि लोगुं थै लगा कि ये देशल आजादी लियाल, तभि भठै पहाड़ियुं कु अपिड़ि घार-गुठ्यरि छोड़िकि इनै-उनै जाणु लग्‍यूंचा। वखका ल्‍वगुंल यो भि नि स्‍वाचु कि जख ऊंक जीवनकू अंकुर फुटा, वी धरती थै सदनिकु छ्वड़णकु क्‍या मतलबचा। क्‍या कैथे अपिड़ि जन्‍मभूमिका अलावा कखि और सै मान-सम्‍मान मीलसकदा, यो प्रश्‍न हरेक पहाड़ी थै अफुथै पुछण चैंणुच। मीथै विश्‍वास चा कि येका बाद अपड़ु पहाड़ी घार-गुठ्यारु छ्वण से पैलि पहा‍ड़्यूं थैं कतगै दा स्‍वचुण प्‍वाड़लु। 
          इबरि पहाड़ुंकि हालत या हुईंचा कि वख गां-का-गां और घार-का-घार उड्यार हुंया छी। कै कै घारम बूड-बुड्यौं थै छोड़िकि और क्‍वी मनिख नि देखेंदु। बाघ जूदा लग्‍यूंच। म्‍यार गांवै समिणि मल्‍था गां च। जबरि सर्या दुनिया दिवालि मनाणै तयारि कनी छाई, उबरि यानि कि ठिक दिवलि से एक या द्वी हफ्ता पैलि मल्‍था गांवकि द्वी कज्‍यण्‍यू थै बाघल मार द्या। समाचारुंम पिथौरागढ़कि बारम भि पाड़। वख भी निर्भ‍गि आदमखोर बागल आठ-दस लोग धधोड़ दीं। देवभूमि कु ये सै ज्‍यादा दुर्भाग्‍य और क्‍या ह्वै सकद! हमरि धरती कु यो कन बरमंड रुस्‍याणुचा। 
          जगा-जगा गदनों फर डाम-डामर ठोकिकै, पाणि रोकिकी बिजली बणाणकु जो भूत देशाकि और राज्‍य सरकार फर सवार हुयूंचा, वै‍कु परिणाम ता केदारनाथकि तबैका रूपमा हम सबुल दे‍खी या‍ल, पर अपड़ा घार-बूण छवणणकि सजा भी पहाड़्यूं थैं बागैकि डैरकि रूपम मिलणीच।

रविवार, 2 नवंबर 2014

कौथिगकि चखल-पखल

म्‍यारु ज्ञान अपड़ा गढ़्वाला का बारम इतैग चा कि मिल अपड़ जीवनम अपड़ा आंखोंल जो कुछ द्यखा मीखुणै वी गढ़्वलि इतिहास और वर्तमान चा। ब्‍वानौ मतलब योचा कि मिल गढ़्वालाका बारमा क्‍वी ऐतिहासिक ग्रंथ या किताब नि पाढ़ि, जो मीथै वखका बारमा अच्‍छी जानकारी दे साकि। और अगर कभि पाढ़‍ि भी ह्वेलि ता मीथै कुछ याद नीचा कि वैमा म्‍यारा मुलुक का बारमा कुछ छैं भि छाई या ना। 
          अपड़ू घार-गुठ्यार और वैकि परम्‍परा तब्बि अच्‍छी लगद, जब वैमे हि रचे-बसेंदुच। घार-बार छोड़िकि कखि कै निर्भगि परदेसमा अपड़ि संस्‍कृति और परम्‍पराओं कि झूठी हड़का मरणु ठिक नि हूंदु। गढ़्वाल जै हिमालय पट्टी कु खास हिस्‍सा चा, वैकीहि कारण सर्या भारत देशकि रव्टि-पाणि चलनी च, पर ज्‍यादातर गढ़्वल्यिूं थै हि पता नीचा कि ऊंकी धरती कु मूल्‍य कतगा चा और वो वींका दम फरा अपणु रव्टि-पाणि कु हक ठोक-बजा कै मांग सकदि। 
          नोएडा कु सेक्‍टर 11 कु नेहरु युवा केन्‍द्र मा तीन दिनों कु पहाड़ी शरदोत्‍सव चलनूच आजकल। आज वैकु अाखिरी दिन छाई। घरवलि पड़ोस्‍युंका द‍गड़ा ये कौथिगम जाणकु बड़ी बेचैन हुंई छाई। म्‍यारा कार्यालय का दगड़्या भि कौथिगम जाणकु हथ-खुट्टा रगणणा छाई। ऊंला मीथै भ‍ि कथगै दा हुलकाई कि चल ब्‍यटा चल ले तू भि, पर म्‍यारु खट्टू पराण इन कौथिगुम जाणुकु कभि राजि नि ह्वे सकदू। मीथै पता छाई कि वख पहाड़ी कौथिगकु बहाना से कतगा खत्‍यूं माहौला हुयूं ह्वालू। जब कार्यालय का दगड़्योंल मीथै कौथिग्‍युक सच बथा त मीथै बड़ू दुख ह्वा। ऊंल बथा कि वख छ्वारा दारु पेकै अयां छा और ऊंकु हंगामा मचायुंछा। तुर्रिकट जींस और टी-शर्ट मा, नरेन्‍द्र सिंह नेगी का गाणौ मा दारु पेकै नचणा छ्वारों और कज्‍यण्‍यूं और लौड़ि्यूं थैं छ्यंण्‍कु भीड़मा घुस्‍यां देशी छ्वारों की गालि का अलावा और त वख कुछ नि छा।
          गढ़्वलि कज्‍यणु थै अगर अपणि संस्‍कृति अच्‍छी लगदा ता यांकु मतलब यु नीच कि वो देश मा जखि-कखि आयोजित हूणवला सुदि-मुदि कौथग्‍युं मा अपणि बेइज्‍जती कराणकु पौंछ जा। ऊंथै कौथग्‍युं के बजाय सबसे पैलि अपड़ि इज्‍जतका बारामा स्‍वचण चैणुं। कौथिगकि इन चखल-पखल हमरि बेटी-ब्‍वारियूं, हमरि संस्‍कृति और हम सब थै भौत भारि प्‍वड़द, किलै कि देशी लोग ता यूं कौथिग्‍यूं थै देखिकि ही हमरु और हमरु समाज कु अनुमान लगांदिना। बिगड़्या जाट-गुर्जरों थैं क्‍या पता कि देवभूमि कु क्‍या महत्‍व च पूरी दुनिया मा!